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करें दिल्ली की बात..कैसे जीत गई 'आप'!

Posted On: 10 Feb, 2015 Politics में

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करें दिल्ली की बात..कैसे जीत गई ‘आप’!

दिल्ली का काम पिछले साल भर से बिना किसी पार्टी और चीफ मिनिस्टर के चल रहा था!..दरमियान जब केंद्र में बीजेपी सरकार आ गई और कॉंग्रेस को बहुत बड़ी हार का सामना करना पड़ा…तब यह आम जनता के लिए एक चमत्कार ही था! ‘आप’ पहले दिल्ली में सरकार बना चुकी थी!..चीफ मिनिस्टर अरविंद केजरीवाल ही थे!…लेकिन ये ‘आप’ की सरकार सिर्फ 39 दिन तक ही अस्तित्व में रही!..खैर तब भी इतने कम समय में जनता के लिए ‘आप’ के अरविंद केजरीवाल ने अच्छे काम कर दिखाए!…मुख्य मुद्दा भ्रष्टाचार का था!…भ्रष्टाचार पर कुठाराघात करने का काम इस दरमियान अवश्य हुआ!..लेकिन नए राजनीतिज्ञ अरविंद केजरीवाल ने जो गवर्नमेंट बनाने के लिए कॉंग्रेस का सपोर्ट लिया था…उसकी वजह से या अन्य मुश्किलों की वजह से, केजरीवाल ने पार्लियामेंट में बहस के दरमियान त्यागपत्र पेश कर दिया!…जिस जनता ने अरविंद केजरीवाल को जीता कर, दिल्ली की सी.एम. की कुर्सी बहाल की थी; उस जनता के दिल को तब बहुत बड़ा धक्का लगा!..जनता का विश्वास अरविंद केजरीवाल पर से उठ गया!

..फिर आए पार्लियामेंट के चुनाव!..तब गुजरात के, तब के चीफ मिनिस्टर नरेन्द्र मोदी ने भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाई और देश भर में बीजेपी का जय जय कार होना शुरू हुआ!…नरेन्द्र मोदी की छबी की ही वजह से बीजेपी की जीत हुई और इतने वर्षों से शासन करती आई कॉंग्रेस पार्टी की हार हो गई!…कॉंग्रेस के कुछ नेता भ्रष्टाचार में लिप्त पाए गए यही कॉंग्रेस की हार का मुख्य कारण था! बहुत से गोटालों का पर्दाफाश भी इसी दरमियान हुआ!..जनता अब कॉंग्रेस को नकार चुकी थी!बीजेपी की केंद्र में सरकार बनने पर श्री, नरेन्द्र मोदी प्रधान मंत्री घोषित किए गए!…प्रधानमंत्री बनने के बाद उनसे जनता उम्मीद कर रही थी कि जितनी जल्दी हो सके…भ्रष्टाचार को नेस्त नाबूद करने का काम वो करें!…लेकिन जनता को लगा कि बीजेपी में कुछ ऐसे नेता है जो भ्रष्टाचार को नेस्तनाबूद करने के काम में ढील बर्ताने का काम कर रहे है…नेक काम में रुकावटें डाल रहे है!…सिर्फ लगना या महसूस करने तक बात सीमित नहीं रही बल्कि इस बात के सबूत भी सामने आने लगे.. तब जनता ने जाना कि बीजेपी पर भरोसा तो कर सकतें है पर पूर्णतया नहीं! मोदी जी के एक साथ किए गए विदेश के दौरे और विदेशी मेहमानों का आगमन भी जनता को अखर गया!…26 जनवरी के अवसर पर अमेरिका के प्रेसिडेंट बराक ओबामा को आमंत्रित करना भी कुछ लोगों के मत से मोदी जी का गलत फैसला था!…यह सब देखते हुए मोदी और बीजेपी की लोकप्रियता अपने आप ही कम हो गई!

..ऐसे में दिल्ली के चुनाव सिर पर आ गए!…अरविंद केजरीवाल की ‘आप’ पार्टी फिर सक्रिय हो उठी! इस बार इस पार्टी के कार्यकर्ता और खुद अरविंद केजरीवाल फिर जनता के बीच पहुँच गए!…उन्होंने लोगों से कहा कि हम पहले वाली गलती फिर नहीं दोहराएंगे!…अगर आपने वोट दिया तो ‘आप’ की सरकार…याने कि अरविंद केजरीवाल की सरकार पूरे पांच साल चलेगी और भ्रष्टाचार नाबूद करने के अलावा और भी बहुत से अच्छे काम जनता के लिए करेगी!…इस प्रकार से इस पार्टी ने जनता का विश्वास फिर से प्राप्त कर लिया!…कॉंग्रेस पर से जनता का विश्वास पहले ही उठ चुका था!..कॉंग्रेस ने इस चुनाव के दरमियान जनता का विश्वास हासिल करने के लिए ज्यादा परिश्रम भी नहीं किए!…बीजेपी औएर स्वयं प्रधान मंत्री ने इस चुनाव में जनता का दिल जीतने के लिए बहुत मेहनत की!..कॉंग्रेस के शासन काल के दरमियान जिस के साथ अन्याय हुआ था ऐसी पुलिस ऑफिसर किरण बेदी ने भी बीजेपी में दाखिला लिया!बीजेपी की तरफ से किरण बेदी को…बनने वाली दिल्ली की मुख्यमंत्री के तौर पर पेश किया गया!…बीजेपी के कार्यकर्ताओ ने भी दिल्लीवासियों को अपने पक्ष में करने की बहुत कोशिश की!…लेकिन जीत अरविंद केजरीवाल की..’आप’ की हो गई!..बीजेपी को हार का सामना करना पड़ा!…कॉंग्रेस का तो कोई भी उम्म्मीदवार जीत हासिल नहीं कर पाया!

…आखिर जो भी है, जनता का फैसला है!..बनने वाले दिल्ली के मुख्य मंत्री अरविंद केजरीवाल से बहुत सी अपेक्षाएं जनता को है!…आशा करें कि वह जनता की उम्मीद पर खरें उतरें!

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Shobha के द्वारा
February 10, 2015

आदरणीया बहुत अच्छा बड़ी मेहनत से लिखा गया लेख शोभा भारद्वाज

jlsingh के द्वारा
February 10, 2015

उम्मीद पर दुनिया कायम है आदरणीया जनता अपने हुक्मरानों से उम्मीद लगाती है और अक्सर मुंह की खाती है, अब देखना है अरविन्द कहाँ तक सफल होते हैं. उनपर चारो तरफ से निशाने लगेंगे. धैर्य से काम निकालना होगा. समर्पित कार्यकर्ता तैयार करने होंगे. सादर!

jlsingh के द्वारा
February 10, 2015

उम्मीद पर दुनिया कायम है आदरणीया! जनता अपने हुक्मरानों से उम्मीद लगाती है और अक्सर मुंह की खाती है, अब देखना है अरविन्द कहाँ तक सफल होते हैं. उनपर चारो तरफ से निशाने लगेंगे. धैर्य से काम निकालना होगा. समर्पित कार्यकर्ता तैयार करने होंगे. सादर!

arunakapoor के द्वारा
February 13, 2015

धन्यवाद शोभा जी!

arunakapoor के द्वारा
February 13, 2015

धन्यवाद जे.एल सींघ जी!


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